(दिनेश शर्मा)
आजादी के बाद पहली बार 1952 में स्व. तुलसी नारायण मेहता की अध्यक्षता में पालिका बोर्ड का गठन हुआ शुरुआती दौर में पालिका मण्डल का कार्यकाल 3 वर्षीय होता था। राज्य में स्वतंत्र चुनाव आयोग नही होकर राज्य सरकार द्वारा ही स्वायतशासी निकाय एवम पंचायत राज के चुनाव करवाये जाते थे जिसके कारण अधिकाश समय राज्य सरकार द्वारा अपनी मनमानी करते हुए पालिकाओं में प्रशासकों की नियुक्ति कर दी जाती थी।
1990 में केंद्र की राजीव गांधी सरकार ने एक अध्यादेश पास कर राज्यो में स्वतंत्र निर्वाचन आयोग का गठन कर स्वायत्तशासी निकायों का कार्यकाल 5 वर्षीय कर निकाय चुनाव अनिवार्य कर दिये गए।
1990 में हुए पालिका चुनाव में स्व महावीर प्रसाद जैन पालिकाध्यक्ष चुने गए और सही मायने में शहर के विकास ने गति पकड़ी। इंद्रा कॉलोनी, महावीर कॉलोनी, सुभाष कॉलोनी, श्यामा प्रसाद मुखर्जी नगर, दीन दयाल कॉलोनी आदि का आवंटन किया गया। शिवाजी पार्क की नींव रखी गई। 1995 में हुए पालिका चुनाव में पुनः जैन पालिकाध्यक्ष चुने गए और नगर में नव आवंटित कॉलोनियों में सड़कों नालियों पार्को का निर्माण किया गया शिवाजी पार्क का निर्माण कर आम जनता के लिए खोल दिया गया। सही मायनों में शहर के नव निर्माण के लिए यह 10 वर्ष काफी महत्वपूर्ण रहे।
2000 में स्वायत्त शासी निकायों में आरक्षण लागू कर दिया गया जिसमें पालिकाध्यक्ष की सीट अनुसूचित जाति वर्ग के खाते में आई और कांग्रेस की प्रेम देवी वर्मा पालिकाध्यक्ष चुनी गई किन्तु कार्यकाल के बीच मे ही भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोपो के चलते प्रेम देवी वर्मा को निलंबित कर दिया गया और भाजपा के ग्यारसी लाल परिडवाल को पालिकाध्यक्ष का प्रभार मिला परिडवाल को 6 माह भी पूर्ण नही हुए थे उससे पूर्व ही प्रेम देवी वर्मा आरोपमुक्त होकर पुनः पालिकाध्यक्ष बनी पालिका का यह कार्यकाल विवादों में ही रहा और विकास का पहिया थमा सा रहा।
2005 में पुनः सीट सामान्य वर्ग की होने पर भाजपा के महावीर प्रसाद जैन पालिकाध्यक्ष निर्वाचित हुए किन्तु जैन इस कार्यकाल में विकास के जिस विस्वास के साथ जनता ने उनको चुना था उस पर विपक्ष के भारी विरोध के चलते खरे नही उतर पाये और सामान्य कार्यो के अतिरिक्त कोई विशेष उपलब्धि हासिल नही कर पाए।
2010 में पालिकाध्यक्ष की सीट पुनः सामान्य वर्ग के खाते में आई और कांग्रेस की हीना इसरानी पालिकाध्यक्ष चुनी गई। शहर के विकास के लिए हीना इसरानी का कार्यकाल स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाने काबिल था इस पांच वर्षीय कार्यकाल में सुनियोजित विकास कार्य हुए और शहर का आधुनिकीकरण हुआ सड़के चौड़ी की गई डिवाइडर बना कर महानगर की तर्ज पर सुनियोजित विकास कार्य करवाये गए।
शहर के मुख्य मार्ग राजमार्ग पर पुराना चुंगी नाका से एफ सी आई गोदाम तक और झिलाय रोड को अहिंसा सर्किल से कृषि उपज मंडी तक पर सी सी की मजबूत सड़के बनवाई गई उन पर पुराना चुंगी नाका से बनस्थली मोड़ तक और झिलाय रोड पर अहिसा सर्किल से बाई पास तक सड़को को चौड़ा करवा डिवाइडरो के निर्माण कार्य करवाये गए, आधुनिक एल ई डी लाईटे लगवाई गई, नालो और नालियों का निर्माण करवाया गया, नीलामी के माध्यम से नव विकसित कॉलोनियों में भूखण्डों का आवंटन किया गया। शहर की विभिन्न कॉलोनियों में सामुदायिक भवनों का निर्माण करवाया गया। हीना इसरानी के इस पांच वर्षीय कार्यकाल में निवाई का बहुआयामी विकास हुआ इसी के परिणामस्वरूप 2015 के पालिका चुनाव में कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत मिला किन्तु अपनी ही पार्टी के कुछ पार्षदों द्वारा विश्वासघात कर भाजपा को वोट देने से भाजपा की राजकुमारी शर्मा पालिकाध्यक्ष चुनी गई परन्तु सामान्य प्रशासनिक कार्यों को छोड़ कर पालिका के इस कार्यकाल में कोई विशेष विकास कार्य नही हुए।
2020 पालिका क्षेत्र का परिसीमन कर 35 वार्ड बनाये गए और पालिकाध्यक्ष की सीट पुनः सामान्य वर्ग के कोटे में आई जिसमे पालिकाध्यक्ष पद के लिए कई दावेदार मैदान में उतरे है जिनमे दिलीप इसरानी अपनी पत्नी के कार्यकाल में करवाये गए विकास कार्यो के दम पर पुनः निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर मैदान में उतरे है।
भाजपा की और से ओम प्रकाश गुप्ता, जितेंद्र जैन, रतनदीप गुजर, राजकुमारी शर्मा, युवा मोर्चा के मण्डल अध्यक्ष योगेंद्र सिंह नाथावत सहित कई प्रत्याशी मैदान में है वही कांग्रेस की और से निवर्तमान पालिका उपाध्यक्ष पारस जैन, राजकुमार करनानी, डोली चौधरी, पवन शर्मा, शहर ब्लॉक अध्यक्ष महावीर प्रसाद जैन और विमल जैन सहित कई प्रत्याशी मैदान में है।

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